भावतत्त्वविचारः
काव्यशास्त्रे यावदेव काव्यतत्त्वानां पर्यालोचनं क्रियते तावदेव तस्मिन् नूतनानां तत्त्वानामाविर्भावः। यथा ध्वन्यालोककारेणोक्तं यत् - “सहस्रशो हि महात्मभिरन्यैरलङ्कार- प्रकाराः प्रकाशिताः प्रकश्यन्ते च”। तथैव सर्वेषां काव्यतत्त्वानां विकासः जायते। मुनयो विभिन्ना मतयो विभिन्नेति न्यायेन काव्यतत्त्वविष...
I tiakina i:
| Kaituhi matua: | |
|---|---|
| Hōputu: | Artigo |
| Reo: | Inglês |
| I whakaputaina: |
SUGYAN KUMAR MAHANTY
2020-12-01
|
| Rangatū: | Prachi Prajna |
| Ngā marau: | |
| Urunga tuihono: | https://drive.google.com/file/d/1Dws89fgLnk4T3-ySaIo3i8dOmCFRjMYe/view |
| Ngā Tūtohu: |
Kāore He Tūtohu, Me noho koe te mea tuatahi ki te tūtohu i tēnei pūkete!
|
