अद्वैतवेदान्ते पञ्चमहासंज्ञाविमर्शः
भारतीयदर्शनेषु वेदान्तदर्शनस्य स्थानम् अतीव गुरुत्त्वपूर्णमास्ते। वेदान्तदर्शने हि भारतीयाध्यात्म-शास्त्रस्य चरमो विकासो लक्ष्यते। वेदान्तदर्शनम् उत्तरमीमांसा वेति मुख्यतः उपनिषदां तत्त्वज्ञानं प्रतिपादयति। वेदान्तो नाम उपनिषदिति। वेदस्यान्तः सिद्धान्तो वेति विशिष्टार्थेऽस्य प्रयोगः उपनिषदि दृश्यते।...
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| Автор: | |
|---|---|
| Формат: | Artigo |
| Мова: | Inglês |
| Опубліковано: |
SUGYAN KUMAR MAHANTY
2021-12-01
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| Серія: | Prachi Prajna |
| Предмети: | |
| Онлайн доступ: | https://drive.google.com/file/d/13gIle-yYWvdCfzJwvHKQjA6OJvSm6aoe/view?ts=61ab0996 |
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